ब्रिटेन में सामने आया police officer of rape से जुड़ा मामला न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक महिला ने अपने पूर्व साथी, जो पेशे से पुलिस अधिकारी था, पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। उसे उम्मीद थी कि पुलिस उसकी बात सुनेगी और न्याय मिलेगा। लेकिन मामला उलट गया और वही महिला अदालत के कटघरे में खड़ी हो गई।
महिला का कहना था कि यौन संबंध के दौरान उसने साफ तौर पर सहमति वापस ले ली थी। इसके बावजूद उसका साथी नहीं रुका। घटना के बाद वह शारीरिक और मानसिक दर्द से गुजरी। मेडिकल जांच भी कराई गई। फिर भी उसने शुरुआत में शिकायत नहीं की, क्योंकि आरोपी एक पुलिस अधिकारी था। बाद में जब उसने हिम्मत जुटाई, तो police officer of rape का मामला दर्ज कराया गया।
जांच के दौरान आरोपी अधिकारी ने एक गुप्त ऑडियो रिकॉर्डिंग पेश की। उसने दावा किया कि यह रिकॉर्डिंग सहमति साबित करती है। पुलिस ने इसी आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। उल्टा महिला पर झूठा आरोप लगाने और न्याय प्रक्रिया को बाधित करने का केस दर्ज कर दिया गया।
आखिरकार अदालत ने महिला को बरी कर दिया। जज ने कहा कि पूरा अभियोजन गलत आधार पर शुरू हुआ था। यह मामला दिखाता है कि police officer of rape जैसे संवेदनशील आरोपों में जांच की निष्पक्षता कितनी जरूरी है।
Yugvardhini | Aarti sharma के अनुसार, ऐसे मामलों में पीड़ितों का भरोसा टूटता है। इससे कई वास्तविक पीड़ित आगे आकर शिकायत करने से डर सकते हैं।
