भारत में सोना चांदी बाजार हमेशा निवेशकों और आम जनता के लिए महत्वपूर्ण रहा है। कस्टम ड्यूटी में बदलाव का इस पर सीधा असर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में यूनियन बजट में सोने और चांदी की आयात शुल्क दर में उतार-चढ़ाव ने इनके घरेलू भावों को प्रभावित किया है।
भारत में अधिकांश सोने और चांदी की खपत आयातित सामग्री पर निर्भर है। उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2025 में दीवाली के समय भारत के सोने के आयात में $14.72 बिलियन का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि कस्टम ड्यूटी की दरें सीधे कीमतों और मांग को प्रभावित करती हैं।
पिछले पांच बजटों में सोना और चांदी पर कस्टम ड्यूटी में कई बदलाव हुए। 2021 में यह घटाकर 7.5% किया गया, 2023 में चांदी पर बढ़ोतरी हुई, 2024 में फिर घटाकर 6% किया गया, और 2025 में कोई बदलाव नहीं हुआ।
सोना चांदी बाजार में निवेशकों को हमेशा कस्टम ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार की रुझानों पर ध्यान रखना चाहिए। वित्त मंत्री के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद (EGR) और भौतिक सोने के बीच लेन-देन को कैपिटल गेन टैक्स से मुक्त कर दिया गया है, जिससे निवेशकों के लिए सोना और चांदी में निवेश आसान हुआ है।
Yugvardhini | Aarti sharma के विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले बजट में यदि कस्टम ड्यूटी घटाई जाती है, तो घरेलू सोने और चांदी की कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन वैश्विक बाजार के रुझान लंबे समय तक प्रभावित करेंगे।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. सोना चांदी बाजार पर कस्टम ड्यूटी का क्या असर होता है?
कस्टम ड्यूटी बढ़ने से कीमतें बढ़ती हैं और घटने पर कीमतें कम होती हैं।
Q2. भारत में सोने और चांदी की मांग क्यों अधिक है?
धार्मिक, शादी और निवेश दोनों के लिए सोने और चांदी की मांग हमेशा अधिक रहती है।
Q3. EGR क्या है और इसका निवेशकों पर क्या असर है?
EGR यानी इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद, जिससे निवेशकों को भौतिक सोने के बिना सोने में निवेश करना आसान होता है।
