झारखंड के देवघर जिले में देवघर अवैध बालू खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई नदियों से कथित रूप से खुलेआम बालू निकाला जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन और रात ट्रैक्टर और अन्य वाहनों के जरिए बालू का परिवहन जारी है। इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि नदियों का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ने लगा है।विशेषज्ञों का कहना है कि देवघर अवैध बालू खनन से भूजल स्तर गिर सकता है और नदी किनारे कटाव की समस्या बढ़ सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए एनजीटी ने समय-समय पर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनका पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
FAQ
प्रश्न 1: देवघर में अवैध बालू खनन क्यों चर्चा में है?
उत्तर: एनजीटी के निर्देशों के बावजूद कई नदियों में कथित रूप से अवैध बालू खनन जारी होने के कारण यह मामला चर्चा में है।
प्रश्न 2: अवैध बालू खनन से क्या नुकसान होता है?
उत्तर: इससे नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, भूजल स्तर प्रभावित होता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
