भारत-ईयू एफ़टीए क्या है और क्यों अहम है
भारत-ईयू एफ़टीए को हाल के वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता माना जा रहा है।
इस समझौते का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को आसान बनाना है।
टैरिफ में कटौती और बाजार तक बेहतर पहुंच इसका मुख्य आधार है।
भारत-ईयू एफ़टीए से भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते, रत्न-जवाहरात और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वहीं यूरोपीय संघ को भारत जैसे बड़े और तेज़ी से बढ़ते बाजार में अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा।
सरकार का कहना है कि भारत-ईयू एफ़टीए से रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
एमएसएमई सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने में मदद मिलेगी।
हालांकि, डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता रणनीतिक रूप से भारत के लिए अहम है।
लेकिन कार्बन टैक्स जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत जरूरी मानी जा रही है।
यह लेख Yugvardhini | Aarti sharma के लिए तैयार किया गया है।
FAQs
प्रश्न 1: भारत-ईयू एफ़टीए का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार बढ़ाना और शुल्क कम करना।
प्रश्न 2: भारत-ईयू एफ़टीए से किन सेक्टरों को फायदा होगा?
उत्तर: टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और हस्तशिल्प सेक्टर।
प्रश्न 3: क्या यह समझौता सभी उत्पादों पर लागू है?
उत्तर: नहीं, कुछ संवेदनशील कृषि और खाद्य उत्पाद बाहर रखे गए हैं।
