अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम पार्टी के संस्थापक कमल हासन ने संसद में बोलते हुए बिहार ज़िंदा मुर्दे विवाद को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई ज़िंदा नागरिकों को मृत घोषित कर दिया गया, जिसके कारण उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए।
कमल हासन ने इस स्थिति को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अनजाने में ही सही, लेकिन इस “बिहार वाली बीमारी” को बढ़ावा दे रहा है। उनके अनुसार, नामों की मामूली वर्तनी, दस्तावेज़ों की छोटी गलतियां और तकनीकी त्रुटियों को अयोग्यता का आधार बनाया जा रहा है।
हासन ने चेतावनी दी कि यदि बिहार ज़िंदा मुर्दे विवाद जैसा हालात तमिलनाडु तक पहुंचे, तो काग़ज़ों में लगभग एक करोड़ लोग “जीवित मृतक” बन सकते हैं। उन्होंने मांग की कि जिन नागरिकों के नाम काटे गए हैं, उन्हें तुरंत मतदान का अधिकार वापस दिया जाए।
संसद में उनके बयान का विपक्षी दलों ने ज़ोरदार समर्थन किया। यह मुद्दा अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
यह रिपोर्ट yugvardhini I Aarti sharma के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. बिहार ज़िंदा मुर्दे विवाद क्या है?
SIR प्रक्रिया में ज़िंदा मतदाताओं को मृत दिखाकर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मामला।
Q2. कमल हासन ने क्या मांग की है?
उन्होंने सभी प्रभावित मतदाताओं को दोबारा मतदान अधिकार देने की मांग की है।
Q3. क्या यह मुद्दा दूसरे राज्यों तक फैल सकता है?
कमल हासन के अनुसार, सही सुधार न होने पर यह खतरा अन्य राज्यों में भी हो सकता है।
