Supreme Court में हाल ही में PIL कॉन्सेप्ट खत्म करने को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि जनहित याचिका का उद्देश्य अब पहले जैसा नहीं रहा। पहले के समय में गरीब और अशिक्षित लोग अदालत तक नहीं पहुंच पाते थे, इसलिए PIL जरूरी थी। लेकिन अब डिजिटल युग में ई-फाइलिंग और ऑनलाइन सुनवाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे हर व्यक्ति के लिए न्याय पाना आसान हो गया है। इसी आधार पर सरकार का मानना है कि PIL कॉन्सेप्ट खत्म करने का समय आ गया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अलग राय रखी। अदालत ने कहा कि वह पहले से ही PIL मामलों में सतर्क है। केवल मजबूत और ठोस मामलों पर ही सुनवाई होती है। इसलिए इसे पूरी तरह खत्म करना जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि PIL ने कई सामाजिक मुद्दों को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में इसे खत्म करने के बजाय सुधार करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. PIL क्या होती है?
PIL यानी जनहित याचिका, जो समाज के हित में कोर्ट में दायर की जाती है।
Q2. PIL कॉन्सेप्ट खत्म क्यों करने की बात हो रही है?
सरकार का मानना है कि अब डिजिटल सुविधाओं से कोर्ट तक पहुंच आसान हो गई है।
Q3. क्या PIL खत्म हो जाएगी?
अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बहस जारी है।
