ओडिशा में सामने आया ओडिशा साइबर जासूसी केस देश की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला बन गया है। भुवनेश्वर की एसडीजेएम कोर्ट ने सात लोगों को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला ओटीपी और सिम कार्ड के दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसमें संवेदनशील जानकारी विदेशी एजेंट तक पहुंचाई गई।
इस ओडिशा साइबर जासूसी केस में अदालत ने 56 दस्तावेजी साक्ष्य और 11 गवाहों के बयान के आधार पर फैसला सुनाया। सभी दोषियों पर 32,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा तय की गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी सिम कार्ड खरीदकर उनके ओटीपी विदेशी नेटवर्क के साथ साझा करते थे। इससे संदिग्ध पाकिस्तानी एजेंटों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलती थी। इस ओडिशा साइबर जासूसी केस का खुलासा STF ने किया, जिसने 2023 में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया था।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ फ्रॉड नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: ओडिशा साइबर जासूसी केस क्या है?
उत्तर: यह मामला ओटीपी और सिम कार्ड के जरिए विदेशी एजेंट को जानकारी देने से जुड़ा है।
प्रश्न 2: दोषियों को क्या सजा मिली?
उत्तर: सातों दोषियों को तीन साल की जेल और जुर्माना लगाया गया।
प्रश्न 3: केस का खुलासा किसने किया?
उत्तर: STF ने जांच के दौरान इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
