भारत में आर्थिक गतिविधियों और कर अनुपालन में लगातार सुधार का असर अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2024 में जीएसटी संग्रह 1.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में लगभग 8.5 प्रतिशत अधिक है। नवंबर 2023 में यह आंकड़ा करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये था।
सरकार के अनुसार, इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण घरेलू लेनदेन में वृद्धि, बेहतर टैक्स अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों में लगातार तेजी है। त्योहारी सीजन के दौरान व्यापार और उपभोक्ता खर्च बढ़ने से भी कर संग्रह में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला।
जीएसटी संग्रह का विवरण
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2024 में कर संग्रह इस प्रकार रहा:
- केंद्रीय जीएसटी (CGST): 34,141 करोड़ रुपये
- राज्य जीएसटी (SGST): 43,047 करोड़ रुपये
- एकीकृत जीएसटी (IGST): 91,828 करोड़ रुपये
- उपकर (Cess): 13,253 करोड़ रुपये
यह लगातार छठा महीना है जब मासिक जीएसटी संग्रह 1.60 लाख करोड़ रुपये के स्तर से ऊपर बना हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है और कर प्रणाली पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत जीएसटी
संग्रह सरकार की राजस्व स्थिति को मजबूत करेगा।
इससे बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास योजनाओं
पर निवेश बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
साथ ही, डिजिटल भुगतान और ई-इनवॉइसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने कर चोरी पर नियंत्रण लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले महीनों में इस रफ्तार को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए आर्थिक गतिविधियों में निरंतर वृद्धि, उद्योगों को प्रोत्साहन और कर प्रणाली को और अधिक सरल बनाने की आवश्यकता होगी। फिलहाल, नवंबर 2024 का रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और यह देश की मजबूत कर व्यवस्था को भी दर्शाता है।
