शनिवार की दोपहर अचानक एक बड़ी खबर आ गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा पत्र भेज दिया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की यह खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई।
लोग हैरान थे। कुछ दिन पहले तक सरकारी सूत्र कह रहे थे कि मंत्री जी इस्तीफा नहीं देंगे। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल गई।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा का असली कारण क्या है?
दरअसल नीट परीक्षा को लेकर पिछले कई हफ्तों से बवाल मचा हुआ था। मई में हुई नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक की शिकायतें आई थीं। सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी। सीबीआई जांच भी शुरू कर दी। फिर दोबारा परीक्षा भी कराई गई। लेकिन छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में प्रदर्शन चल रहा था। सैकड़ों छात्र और युवा वहां डेरा डाले बैठे थे। उनकी सबसे बड़ी मांग थी – शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। उन्होंने साफ कह दिया था कि इस्तीफे के बिना कोई बातचीत नहीं होगी।
दबाव इतना बढ़ गया कि आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए।
इस्तीफा पत्र में क्या लिखा है?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा है कि वे पिछले चालीस साल से छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीट में अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत कदम उठाए। जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा भी करवाई गई।
उन्होंने आगे लिखा – “पिछले दस दिनों की घटनाओं से मेरा मन बहुत दुखी है। मैं नहीं चाहता कि जंतर-मंतर की स्थिति का कोई गलत फायदा उठाए। छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फँसे। वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रधानमंत्री जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।”
यह भाषा साफ बताती है कि मंत्री जी पर काफी दबाव था।
जंतर-मंतर पर क्या माहौल था?
जब धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा की खबर पहुंची तो जंतर मंतर पर खुशी का माहौल छा गया।
कई युवा सड़कों पर उतर आए। कुछ ने नारे लगाए, कुछ ने एक-दूसरे को गले लगाया।
कई दिनों से चले आ रहे प्रदर्शन को आखिरकार एक बड़ी सफलता मिल गई थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा नहीं है।
यह परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में पहला कदम है।
अब वे बाकी मांगों पर भी अड़े रहने वाले हैं –
जैसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा और छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेना।
आगे की राह क्या है?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि नया शिक्षा मंत्री कौन बनेगा।
सरकार जल्द ही कोई फैसला ले सकती है।
परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की बातें भी हो रही हैं।
अगले साल से नीट को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट यानी सीबीटी मोड में कराने का फैसला पहले ही हो चुका है।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा की यह घटना साफ दिखाती है कि जब छात्र एकजुट होकर आवाज उठाते हैं
तो सरकार को भी सुनना पड़ता है। कई लोग इसे छात्रों की जीत बता रहे हैं।
कुछ इसे राजनीतिक दबाव का नतीजा भी मान रहे हैं।
जो भी हो, यह खबर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधारों पर नई बहस शुरू करने वाली है।
देशभर के छात्र और अभिभावक अब आगे के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।


