डिजिटल युग में फर्जी खबरें (Fake News) समाज, लोकतंत्र और सूचना तंत्र के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। इसी विषय पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में कहा कि फर्जी खबरें रोकने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ-साथ एक मजबूत और जिम्मेदार डिजिटल व्यवस्था विकसित करना समय की मांग है।
फर्जी खबरें रोकने के लिए संतुलित दृष्टिकोण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फर्जी खबरें केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों की बढ़ती पहुंच के कारण गलत जानकारी तेजी से फैलती है, जिससे समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा हो सकता है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार, तकनीकी कंपनियों और समाज के संयुक्त प्रयासों पर बल दिया।
एआई विकास और जिम्मेदारी
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग देश के विकास,
नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक मानकों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। उनका कहना था कि तकनीक का विकास ऐसा होना चाहिए जो समाज के हितों की रक्षा करे और नागरिकों का विश्वास बनाए रखे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका
मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों और
डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे फर्जी खबरें और
भ्रामक सामग्री की पहचान कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करें।
वहीं, नागरिकों को भी किसी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।
इससे गलत सूचनाओं के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
