राकेश शर्मा के बाद कब जाएगा कोई भारतीय अंतरिक्ष में और कब बनेगा अपना स्पेस स्टेशन?

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। चंद्रयान, आदित्य-एल1 और अन्य सफल अभियानों के बाद अब देश की नजर गगनयान मिशन पर है। वर्ष 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने थे। उनके बाद किसी भारतीय ने अंतरिक्ष की यात्रा नहीं की है। अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन के माध्यम से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन को भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण मानव मिशन माना जा रहा है।

गगनयान मिशन क्या है?

गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान है। इस मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजने की योजना है। मिशन का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यात्रा कराना ही नहीं, बल्कि मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी सभी तकनीकों का सफल परीक्षण करना भी है। इसके लिए अंतरिक्ष यात्रियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और कई मानवरहित परीक्षण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।

अगला भारतीय अंतरिक्ष यात्री कौन होगा?

इस समय ISRO ने गगनयान मिशन के लिए प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया है।

हालांकि, मिशन के अंतिम दल और अंतरिक्ष में जाने वाले सदस्यों की

आधिकारिक घोषणा मिशन के निकट की जाएगी। इसके अलावा, मिशन की सफलता भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान वाले चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूत स्थान दिलाएगी।

भारत का अपना स्पेस स्टेशन कब बनेगा?

भारत वर्ष 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksha Station) स्थापित

करने की योजना पर काम कर रहा है।

साथ ही, वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर

भेजने का भी दीर्घकालिक लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गगनयान मिशन इन महत्वाकांक्षी योजनाओं की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

 

 

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