देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि GDP ग्रोथ में आई हालिया गिरावट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने माना कि जुलाई-सितंबर तिमाही में वृद्धि की रफ्तार धीमी रही। इसके बावजूद, उनका विश्वास है कि तीसरी तिमाही में सार्वजनिक और पूंजीगत खर्च बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और इस कमी की भरपाई हो जाएगी।
GDP ग्रोथ में गिरावट क्यों आई?
जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 5.4 प्रतिशत रही, जो पिछले सात तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है। वहीं, अप्रैल-जून तिमाही में यह दर 6.7 प्रतिशत थी। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यह गिरावट स्थायी नहीं है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक व्यय,
पूंजीगत निवेश और अन्य सरकारी परियोजनाओं में तेजी आने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही, उन्होंने भरोसा जताया कि तीसरी तिमाही में विकास दर में सुधार देखने को मिलेगा।
तीसरी तिमाही से क्यों हैं उम्मीदें?
सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं,
सरकारी निवेश और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इसके परिणामस्वरूप, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेश का माहौल भी मजबूत होगा।
यही कारण है कि सरकार आने वाले महीनों को लेकर आशावादी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर सरकार का भरोसा
इस बीच, वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है। वहीं, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास क्षमता बरकरार है। इसलिए, सरकार को विश्वास है कि आने वाले समय में GDP ग्रोथ दोबारा मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी।
निष्कर्ष
अंत में, सरकार का कहना है कि GDP ग्रोथ में आई मौजूदा सुस्ती अस्थायी है। इसलिए, घबराने की जरूरत नहीं है। यदि सार्वजनिक खर्च, पूंजीगत निवेश और आर्थिक गतिविधियां तय योजना के अनुसार बढ़ती हैं, तो तीसरी तिमाही में विकास दर में सुधार देखने को मिल सकता है।
