उत्तराखंड के हरिद्वार नकल प्रकरण में सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार नकल माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और इस पूरे मामले में दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है और हर आरोपी को कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हजारों युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया को बदनाम करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह मामला केवल परीक्षा में नकल का नहीं, बल्कि संगठित नकल गिरोह से जुड़ा है, जिसकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही है।
जांच के दौरान लापरवाही सामने आने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट
कृष्ण तिवारी को निलंबित किया गया है।
आरोप है कि परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र की तस्वीर बाहर भेजी गई,
लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। इसके अलावा नई टिहरी के एक कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भी जांच में संदिग्ध भूमिका मिलने पर निलंबित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि
भर्ती प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय दोषियों
को सजा दिलाने में सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि हरिद्वार नकल प्रकरण में शामिल
किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा और युवाओं
के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
