चीन के साथ LAC बहाली को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि क्या भारत और चीन के बीच ऐसा कोई समझौता किया जा रहा है, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की पूर्ण बहाली सुनिश्चित नहीं होगी। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को संसद और देश के सामने पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि चीन के साथ LAC बहाली केवल सीमा विवाद का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की अनुमति नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार चीन के साथ हुई बातचीत और किसी भी संभावित समझौते की जानकारी सार्वजनिक करे।
चीन के साथ LAC बहाली पर विपक्ष की मांग
कांग्रेस का कहना है कि यदि भारत और चीन के बीच कोई नया समझौता हो रहा है तो उसमें चीन के साथ LAC बहाली की स्पष्ट गारंटी होनी चाहिए। पार्टी ने सरकार से आग्रह किया है कि सीमा पर मौजूदा स्थिति, सैन्य तैनाती और वार्ता की प्रगति पर संसद में विस्तृत बयान दिया जाए, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बढ़ी राजनीतिक बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत-चीन संबंध हमेशा संवेदनशील रहे हैं।
ऐसे में सीमा विवाद और चीन के साथ LAC बहाली जैसे मुद्दों पर
सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि अंतिम निर्णय और आधिकारिक जानकारी सरकार की ओर से ही सामने आएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पर स्थायी शांति और
विश्वास बहाली के लिए दोनों देशों के बीच निरंतर कूटनीतिक वार्ता आवश्यक है।
आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों को लेकर सरकार के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।
