केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि
संसाधनों की बर्बादी पृथ्वी और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई पार्टनरशिप समिट को संबोधित
करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और
टिकाऊ जीवनशैली अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हालांकि,
उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देशों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अधिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए,
क्योंकि संसाधनों के अत्यधिक उपयोग का बड़ा हिस्सा उन्हीं से जुड़ा रहा है।
संसाधनों की बर्बादी रोकना क्यों जरूरी है?
संसाधनों की बर्बादी का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। इसके साथ ही, अनियंत्रित औद्योगीकरण, ऊर्जा की अधिक खपत और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि सभी देशों को टिकाऊ विकास के सिद्धांतों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मिलकर कार्य करना होगा।
टिकाऊ जीवनशैली पर दिया जोर
इस बीच, पीयूष गोयल ने कहा कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा, ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग और स्वच्छ तकनीकों को अपनाने से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से जिम्मेदार उपभोग की आदत विकसित करने की अपील भी की।
भारत की भूमिका पर क्या कहा?
मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा सतत विकास और वैश्विक सहयोग का समर्थक रहा है।
वहीं, भारत हरित ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार निवेश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।
निष्कर्ष
अंत में, संसाधनों की बर्बादी रोकना केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। इसलिए, यदि सभी लोग जिम्मेदार जीवनशैली अपनाएं और प्राकृतिक संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करें, तो पृथ्वी को सुरक्षित और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर बनाया जा सकता है।
