उत्तराखंड भूस्खलन की घटनाओं ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देहरादून जिले के मसूरी स्थित झड़ीपानी क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण स्थानीय निवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। बारिश के बाद पहाड़ी क्षेत्र की जमीन लगातार धंस रही है, जिससे सड़कों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और कई मकानों की दीवारों में भी दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में जमीन प्रतिदिन
लगभग 2 से 3 फीट तक धंस रही है।
इस कारण कई परिवारों में डर का माहौल है
और लोग अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
बताया जा रहा है कि भूस्खलन की चपेट में आने से मलबे में दबकर एक नेपाली मजदूर की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों की गति को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं।
भूस्खलन से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
उत्तराखंड भूस्खलन से प्रभावित झड़ीपानी क्षेत्र के निवासियों का आरोप है कि अब तक विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वे नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, वैकल्पिक आवास और भूस्खलन रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि हर बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है, जिससे बच्चों को स्कूल भेजने और दैनिक जीवन की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है
और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान
सतर्क रहना और समय पर भू-वैज्ञानिक जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।
उत्तराखंड भूस्खलन जैसी घटनाओं से बचाव के लिए प्रशासन
और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है।
