कैरेबियाई क्षेत्र में आए तूफान मेलिसा ने व्यापक तबाही मचाई है। क्यूबा, हैती और जमैका समेत कई देशों में तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण अब तक कम से कम 75 लोगों की मौत हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा से करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में सड़कें, पुल, बिजली व्यवस्था और संचार सेवाएं ठप हो गई हैं, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अनुसार, तूफान के कारण लाखों लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। हजारों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कई स्कूलों तथा अस्पतालों को भी नुकसान पहुंचा है। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में जुटी हैं। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है।
राहत और बचाव अभियान जारी
संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) प्रभावित इलाकों में खाद्यान्न और जरूरी सामान पहुंचा रहा है। वहीं, खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) किसानों को कृषि उपकरण, पशुओं के लिए चारा और खेती दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं तथा सुरक्षा किट भी उपलब्ध करा रहा है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर
तूफान मेलिसा का असर कृषि, मत्स्य पालन और
पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ा है।
कई फसलें बर्बाद हो गई हैं और मछली
पकड़ने वाली नौकाओं को नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपदा से प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में काफी समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग के
निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचा रही हैं,
जबकि कई देशों में पुनर्वास कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे
शक्तिशाली तूफानों की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है,
जिससे आपदा प्रबंधन और पूर्व तैयारी को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
