भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) के आईआरएस प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति ने अधिकारियों को ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने का संदेश दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि देश की आर्थिक प्रगति में आईआरएस अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।
आईआरएस प्रशिक्षु अधिकारियों को राष्ट्रपति की सीख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आईआरएस प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा
कि भारतीय राजस्व सेवा केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है,
बल्कि यह देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
इसके साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्षता,
ईमानदारी और जवाबदेही को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
आर्थिक विकास में आईआरएस की भूमिका
इस बीच, राष्ट्रपति ने कहा कि आईआरएस अधिकारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आर्थिक समन्वय बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार रखने और डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी, ताकि कर प्रशासन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।
पारदर्शिता और तकनीक पर जोर
राष्ट्रपति ने कर संग्रह प्रणाली में आधुनिक तकनीक के अधिक उपयोग पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणालियों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से करदाताओं
का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
वहीं, अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे जनहित को
सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
निष्कर्ष
अंत में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और आईआरएस प्रशिक्षु अधिकारियों की यह मुलाकात देश के कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने की दिशा में प्रेरणादायक संदेश देती है। इसलिए, ईमानदारी, निष्पक्षता और तकनीक के बेहतर उपयोग के माध्यम से आईआरएस अधिकारी भारत की आर्थिक प्रगति और सुशासन को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।
