भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। नौसेना के लिए तैयार किए गए 8वें मिसाइल और टॉरपीडो बार्ज ‘एलएसएएम 22 (यार्ड 132)’ का सफलतापूर्वक जलावतरण किया गया। यह बार्ज पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है और इसका उद्देश्य नौसेना के परिचालन कार्यों को अधिक सुरक्षित, तेज और प्रभावी बनाना है। इस उपलब्धि से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ बार्ज
इस परियोजना का अनुबंध 5 मार्च 2021 को भारतीय नौसेना और एमएसएमई शिपयार्ड मेसर्स सूर्यदत्ता प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, ठाणे के बीच हुआ था। इस बार्ज का डिजाइन भारतीय इंजीनियरों द्वारा तैयार किया गया है और इसका निर्माण भारतीय नौवहन रजिस्टर (IRS) तथा भारतीय नौसेना के निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया है। निर्माण से पहले इसका मॉडल परीक्षण नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL), विशाखापत्तनम में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
नौसेना की क्षमता होगी और मजबूत
एलएसएएम 22 (यार्ड 132) का उपयोग बंदरगाहों और नौसैनिक अड्डों पर मिसाइल, टॉरपीडो, गोला-बारूद तथा अन्य सैन्य सामग्री के सुरक्षित परिवहन, लोडिंग और अनलोडिंग के लिए किया जाएगा। इससे नौसेना की लॉजिस्टिक क्षमता में सुधार होगा और युद्धपोतों तक आवश्यक सैन्य सामग्री समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे पहले इस परियोजना के तहत सात बार्ज भारतीय नौसेना को सौंपे जा चुके हैं।
‘मेक इन इंडिया’ को मिला बढ़ावा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्वदेशी परियोजनाएं भारत
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इससे घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
और विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।
एलएसएएम 22 (यार्ड 132) का जलावतरण भारतीय नौसेना की
परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’
अभियान को भी नई गति देगा।
यह उपलब्धि भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा विनिर्माण
क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
